छत्तीसगढ़ से 1000 किसानों का जत्था 7 जनवरी को होगा दिल्ली रवाना, कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य में किसान आंदोलन को मजबूत करने बनी रणनीति - state-news.in
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छत्तीसगढ़ से 1000 किसानों का जत्था 7 जनवरी को होगा दिल्ली रवाना, कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य में किसान आंदोलन को मजबूत करने बनी रणनीति

 


छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ से जुड़े संगठनों की आवश्यक बैठक मंथन हॉल कचहरी चौक रायपुर में सम्पन्न हुई जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा लाये गए कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि  और आम उपभोक्ता विरोधी कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला किसान संघ बालोद के संरक्षक व पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर ने  तथा संचालन अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही ने किया।

किसान आंदोलन की समीक्षा के लिए आधार वक्तव्य कृषक बिरादरी के संयोजक  डॉ संकेत ठाकुर ने रखा। 

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 4 जनवरी 2021 को केंद्र सरकार के साथ किसानों की होने वाली बैठक के बाद तीनों कानून वापस नहीं लिये जाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून नहीं बनाया जाने पर अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKSCC) व संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में दिल्ली सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन के साथ एकजुटता कायम करने छत्तीसगढ़ से 1000 किसानों का जत्था 7 जनवरी को राजधानी रायपुर से  दिल्ली के लिए रवाना होगा ।


प्रदेश के किसानों को इन काले कानूनों  से अवगत कराने 8 जनवरी से 22 जनवरी 2021 तक "खेती बचाओ"  यात्रा प्रदेश के सभी धान खरीदी केन्द्रों में चलाई जाएगी । यह यात्रा  22 सितम्बर 2020 को  किसान महासंघ से सम्बद्ध संयुक्त किसान मोर्चा धमतरी से जारी खेती बचाओ आंदोलन का राज्यव्यापी स्वरूप होगा। 23 जनवरी को देशव्यापी किसान आंदोलन के आह्वान पर राजभवन मार्च होगा तथा 24 जनवरी को दूसरा जत्था दिल्ली के लिए रवाना होगा जो 26 जनवरी को दिल्ली के ट्रैक्टर रैली एवं किसानों द्वारा आयोजित परेड में शामिल होगा ।


बैठक में देश व्यापी किसान आंदोलन के संदर्भ में चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र की मोदी नेतृत्व में भाजपा सरकार द्वारा लाये गए तीनों कानून को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा केवल अच्छा है कहकर प्रचारित किया जा रहा है लेकिन कैसे अच्छा है इस सवाल का जवाब उनके पास नहीं है। लगातार किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें जारी है। किसानों की प्रमुख दो ही माँग है कि कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी तीनों कानून वापस लिए जाएं तथा स्वामीमथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून पारित किया जाए। 

राज्य में किसानों की धान खरीदी पर हो रही कठिनाइयों पर भी व्यापक चर्चा की गई जिसमें किसान केन्द्र एवं राज्य सरकार के बीच घटिया राजनीति व  झगड़ों का शिकार हो रहे हैं। खेती बचाओ यात्रा के दौरान इन कठिनाइयों के विरुद्ध मोर्चा खोल धान खरीदी को सुचारू रूप से जारी रखने राज्य सरकार को बाध्य करने का निर्णय लिया गया है। 

बैठक में राजधानी प्रभावित किसान कल्याण संघर्ष समिति के अध्यक्ष रूपन चन्द्राकर, नदी घाटी मोर्चा के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय, आदिवासी भारत महासभा के सौरा यादव, किसान भुगतान संघर्ष समिति महासमुंद से जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर, तत्पर के संयोजक एवं पूर्व विधायक वीरेन्द्र पाण्डेय, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के उपाध्यक्ष मदन लाल साहू व सदस्य ललित कुमार,  आल इंडिया किसान खेत मजदूर संघ से विश्वजीत हारोडे, राष्ट्रीय किसान संघर्ष समिति से पारसनाथ साहू, अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के राज्य संयोजक टिकेश कुमार, क्रांतिकारी नवजवान भारत सभा के गणपत लाल, खेती बचाओ संघर्ष समिति धमतरी से शत्रुघन लाल साहू, राष्ट्रीय किसान मोर्चा से टिकेश्वर साहू, सतवंत महिलांग, संजय चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ अभिकर्ता एवं निवेशक कल्याण संघ के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर,  गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बलजिंदर सिंह, अमरीक सिंह, मनिंदर सिंह खालसा, गुरुदेव सिंह ढिल्लन  सहित कृषकगण द्वारिका साहू, प्रवीण चन्द्राकर, गोविंद चन्द्राकर, डॉ पुरुषोत्तम चन्द्राकर, मूरित राम ठाकुर, नरेन्द्र टण्डन, गजेन्द्र सिंह कोसले, टीकम ठाकुर आदि उपस्थित रहे।

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